राजू गुर्जर, भोपाल:-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4399 दिनों का कार्यकाल पूरा कर भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 4398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए मोदी अब सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने वाले नेता बन गए हैं। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति के राजनीतिक जीवन का मील का पत्थर नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की बदलती प्रकृति, जन अपेक्षाओं और नेतृत्व की नई परिभाषा का भी प्रतीक है।
साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब देश भ्रष्टाचार, नीति-गत ठहराव और आर्थिक चुनौतियों पर व्यापक बहस के दौर से गुजर रहा था। पिछले बारह वर्षों में भारतीय राजनीति का केंद्र काफी हद तक व्यक्तित्व आधारित नेतृत्व और निर्णायक फैसलों की ओर स्थानांतरित हुआ है। मोदी सरकार के कार्यकाल में डिजिटल इंडिया, जीएसटी, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, आधार आधारित कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार, अनुच्छेद 370 का निरस्तीकरण और कोविड महामारी के दौरान दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान जैसे कई बड़े कदम देखने को मिले। हालांकि किसी भी लंबे कार्यकाल की तरह मोदी सरकार का सफर केवल उपलब्धियों की कहानी नहीं है। नोटबंदी, बेरोजगारी, कृषि कानूनों को लेकर हुए आंदोलन, सामाजिक ध्रुवीकरण और संस्थाओं की स्वायत्तता से जुड़े सवाल भी इस दौर की राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं। लोकतंत्र में किसी भी सरकार का मूल्यांकन उसके समर्थकों और आलोचकों, दोनों की नजर से होता है और यही स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहचान भी है।
नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत उनकी जनसंपर्क क्षमता और चुनावी स्वीकार्यता रही है। लगातार तीन लोकसभा चुनावों में जीत हासिल करना इस बात का संकेत है कि देश के एक बड़े वर्ग ने उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया है। वहीं विपक्ष के लिए यह चुनौती भी है कि वह इस लंबे राजनीतिक वर्चस्व का प्रभावी वैकल्पिक विमर्श तैयार करे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की उपस्थिति पहले की तुलना में अधिक मुखर और प्रभावशाली दिखाई देती है। जी-20 की अध्यक्षता से लेकर वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रिय भूमिका तक, मोदी सरकार ने विदेश नीति को घरेलू राजनीतिक विमर्श का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है। इससे भारत की वैश्विक पहचान को नया आयाम मिला है। 4399 दिनों का यह रिकॉर्ड अंत नहीं, बल्कि एक नए मूल्यांकन की शुरुआत है। इतिहास किसी नेता को केवल उसके कार्यकाल की अवधि से नहीं, बल्कि उसके फैसलों के दीर्घकालिक प्रभाव से याद रखता है। आने वाले वर्षों में यह तय होगा कि मोदी युग को भारत के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक विकास के किस अध्याय के रूप में देखा जाएगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति पर अपनी एक ऐसी छाप छोड़ी है, जिसकी चर्चा आने वाले दशकों तक होती रहेगी

